जिंदगी जब तुझको समझा,
मौत फिर क्या चीज है,
ऐ वतन तू हीं बता, तुझसे बड़ा क्या चीज है
भरी जवानी में मां भारती के चरणों में,अपने प्राणों का बलिदान करने वाले, अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पण करता हूँ। कोई भी युद्ध हथियारों के बल पर नहीं लड़ा जाता है, युद्ध लड़े जाते हैं साहस, बलिदान, राष्ट्रप्रेम व कर्त्तव्य की भावना से और हमारे भारत में इन जज्बों से भरे युवाओं की कोई कमी नहीं है।
मौत फिर क्या चीज है,
ऐ वतन तू हीं बता, तुझसे बड़ा क्या चीज है
भरी जवानी में मां भारती के चरणों में,अपने प्राणों का बलिदान करने वाले, अमर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पण करता हूँ। कोई भी युद्ध हथियारों के बल पर नहीं लड़ा जाता है, युद्ध लड़े जाते हैं साहस, बलिदान, राष्ट्रप्रेम व कर्त्तव्य की भावना से और हमारे भारत में इन जज्बों से भरे युवाओं की कोई कमी नहीं है।
भगवत गीता का एक श्लोक है: -
‘हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्’
यानि 'या तो तू युद्ध में बलिदान देकर स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयश्री प्राप्त कर पृथ्वी का राज्य भोगेगा।' शायद इसी श्लोक को प्रेरणा मानकर भारत के उन शूरवीरों ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की धरती से पीछे खदेड़ दिया था। मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा- हमेशा के लिए बसी रहेंगी...यह दिन है उन शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का, जो हँसते-हँसते मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। यह दिन समर्पित है उन्हें, जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिए बलिदान कर दिया।कारगिल विजय का हिस्सा रहे सभी सैनिकों को नमन। आपकी वीरता आज भी लोक स्मृति में सजीव है जिसे भावी पीढ़ियां श्रद्धापूर्वक स्मरण करेंगी। कृतज्ञ राष्ट्र अमर शहीदों, वीर सैनिकों और उनके परिजनों के त्याग का सम्मान करता है।
‘हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्’
यानि 'या तो तू युद्ध में बलिदान देकर स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयश्री प्राप्त कर पृथ्वी का राज्य भोगेगा।' शायद इसी श्लोक को प्रेरणा मानकर भारत के उन शूरवीरों ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की धरती से पीछे खदेड़ दिया था। मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा- हमेशा के लिए बसी रहेंगी...यह दिन है उन शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का, जो हँसते-हँसते मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। यह दिन समर्पित है उन्हें, जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिए बलिदान कर दिया।कारगिल विजय का हिस्सा रहे सभी सैनिकों को नमन। आपकी वीरता आज भी लोक स्मृति में सजीव है जिसे भावी पीढ़ियां श्रद्धापूर्वक स्मरण करेंगी। कृतज्ञ राष्ट्र अमर शहीदों, वीर सैनिकों और उनके परिजनों के त्याग का सम्मान करता है।
रक्त वीर शहीदों का था, हर सपूत बलिदानी था, कारगिल पर्वत शिखर पर पवन चला तूफानी था, हिमप्रपात बन हिमगिरि से रक्त शत्रु का जमा दिया, विजय दिवस की शौर्य पताका देने वाला अभिमानी था।

